पोस्टमार्टम रूम के अंदर की कहानी, एक कर्मचारी की ही जुबानी….

अहमदाबाद। दुनिया में कोई भी काम आसान नहीं, फिर चाहे वह खुले मैदान में अनाज बेचने का हो, या फिर एयरकंडीशंड रूम में बैठकर लिखा-पढ़ी करने का। हर एक काम का अलग पैमाना है और अपनी तरह की मुश्किलें भी। इसके अलावा कुछेक काम बहुत ज्यादा शारीरिक श्रम वाले होते हैं तो कई मानसिक रूप से थका देने वाले। इसी क्रम में आज हम बात कर रहे हैं पोस्टमार्टम करने वाले स्वीपर्स की। छुरी या अन्य उपकरणों से लाशों का पोस्टमार्टम करना हो तो अच्छे-अच्छों का दिल बैठ जाता है और इस पर भी अगर शव इतनी बुरी अवस्था में हो कि उसमें कीड़े लग चुके हों तो..?

पिछले कई वर्षो से पोस्टमार्टम का काम कर रहे अहमदाबाद के बाबूभाई सीतापारा वाघेला ने कुछ ऐसे ही शवों के पोस्टमार्टम की डायरी तैयार की है। इस डायरी में उन्होंने अपने व अन्य कुछ साथियों के अनुभव दर्ज किए हैं। डायरी में ऐसे-ऐसे मामलों का जिक्र किया गया है कि जिनके बारे में सुनकर ही सिर घूम जाए। बाबूभाई कहते हैं कि मैंने ऐसी लाशों का पोस्टमार्टम किया है, जिसे आम आदमी देख ले तो गश खाकर जमीन पर गिर पड़े।

बाबूभाई के शब्दों में… राजकोट के पास पेडक इलाके के सूखे कुंए में एक व्यक्ति की लाश पड़ी हुई थी। लाश लगभग 8 दिन पुरानी थी और इसमें कीड़े लग चुके थे। यह मेरा पहला मामला था। पोस्टमार्टम की तो बात दूर, लाश देखने के बाद मैं कई दिनों तक ठीक से खाना तक नहीं खा सका था। मैं जैसे ही खाना खाने बैठता, मेरी आंखों के सामने वह तस्वीर आ जाती थी।

पुलिस यह लाश एंबुलेंस द्वारा स्ट्रेचर पर रखकर लाई थी, जिसे सीधे ही पोस्टमार्टम रूम में भेज दिया गया था। जब मैंने लाश के ऊपर से चादर हटाया तो देखा कि उसके चारों तरफ इल्लियां रेंग रही थीं। इससे भी ज्यादा मेरे लिए डरावनी बात यह थी कि यह सिर कटी लाश थी। सच कहूं तो पहली बार पोस्टमार्टम करने में मेरे हाथ-पांव थर-थर कांप रहे थे। मेरी जिंदगी का यह एक ऐसा वाकया है, जिसे मैं कभी भुला नहीं सकता।

कुछ वर्ष पहले की ही बात है.. कच्छ से अहमदाबाद जा रही लग्जरी बस की एक मिनी बस से दुर्घटना हो गई थी। दुर्घटना इतनी भीषण थी कि मिनी बस में बैठे सभी 18 यात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई थी। सभी शवों को मोरबी से सिविल अस्पताल लाया गया। लेकिन इतने शवों को पोस्टमार्टम रूम में रखना संभव नहीं था। इसलिए पोस्टमार्टम यार्ड में रखकर ही किया गया था।
एक के बाद एक 18 शवों के पोस्टमार्टम के बाद का नजारा इतना भयानक था कि इसे शब्दों में बखान करना संभव ही नहीं। यह नजारा देखने के बाद बाकी के अन्य स्वीपर्स भी उस दिन खाना नहीं खाया गया था।

The post पोस्टमार्टम रूम के अंदर की कहानी, एक कर्मचारी की ही जुबानी…. appeared first on MastiWale.

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s